B.El.Ed First Year Syllabus

Posted by on March 6, 2020


Here, I will tell You, people, about b.el.ed first year syllabus

courseTitleMarks
Theory-Based
F1.1Child & Development100
F1.2Contemporary India100
C1.1Nature of Language50
C1.2Core Mathematics50
C1.3Core Natural Sciences50
C1.4Core Social Sciences50
Practical Based
PR 1.1Performing & Fine Arts75
PR 1.2Craft, Participatory Work, Colloquia, Academic Enrichment Activities25

 

इकाई 1. मानव विकास की अवधारणाएं, मुद्दे और सिद्धांत : विकास क्या है और हम इसका अध्ययन क्यों करें; विकास सिद्धांत; वातावरण और अनुवांशिकता के प्रभावः विकास के अध्ययन की प्रणालिया; विकास के संदर्भ में सामाजीकरण, शिक्षा और परसंस्कृति-ग्रहण की अवधारणाएं; एरिक्सन, पियाजे और कोलबर्ग के सिद्धांत; मानव जीवन-काल की महत्त्वपूर्ण विकास-अवस्थाएं।

इकाई 2. जन्म और शैशव : गर्भधारण का महत्त्व; जन्म-पूर्व विकास और जन्म; शिशुओं का मानसिक और शारीरिक विकास; शैशव में संवेग; परिवार में शिशु और व्यक्तित्व विकास के लिए इसके निहितार्थ।
इकाई 3. प्राग्विद्यालय विद्यालय-पूर्व बच्चाः शारीरिक वृद्धि एवं पेशीय/गत्यात्मक विकास; बौद्धिक अभिलक्षण: व्यक्तित्व का विकासः तादात्म्य और बच्चों के पालन-पोषण संबंधी तरीकों के विशेष संदर्भ में लिंग से जुड़ी रूढ़ अनुक्रियाएं: नैतिकता; प्राग्विद्यालय बच्चों के खेलों के प्रकार।
काई 4. प्रारंभिक विद्यालयी बालक-बालिका : शारीरिक वृद्धि और विकास; विकासशील मस्तिष्क-बुद्धि, भाषा और चिन्तन; बच्चे की सामाजिक दुनिया-अभिभावक और बच्चे, मित्र स्कूल और मीडिया, खेल; नैतिक अभिवृत्ति और व्यवहार; स्व-पहचान, आत्मधारणा का विकास; लिंगीय भूमिकाएं; प्रारंभिक विद्यालय के बच्चों के खेल, रुचियां और क्रियाकलाप।
इकाई 5. विशेष आवश्यकता वाले बच्चे : विशेष बच्चों की अवधारणा-मेधावी, सृजनात्मक, जन्मजात प्रतिभाशाली बच्चे; मंदग्राही तथा अवस्तर उपलब्धि रखने वाले बच्चे; संवेगात्मक रूप से अशांत बच्चे सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से वंचित बच्चे।

                              समकालीन भारत

(b.el.ed first year syllabus)

इकाई 1. ‘समाज’; ‘सभ्यता; ‘राष्ट्रराज्य’ के रूप में भारत; स्वतंत्रता संघर्ष के फलस्वरूप भारत का ,राष्ट्र-राज्य के रूप में उभरना।

इकाई 2. संविधान : ढांचा और परिधि; संविधान में प्रतिष्ठापित प्रमुख सामाजिक नीतियाँ; बचपन और शिक्षा संबंधी उपबंध; शिक्षा का समवर्ती दर्जा: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1986)।

इकाई 3. आर्थिक मुद्दे : गरीबी और असमता; रोज़गार; निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र; नई आर्थिक नीति।
 
इकाई 4. राजनीतिक मुद्दे : लोकतांत्रिक पद्धति की प्रमुख विशेषताएं: केन्द्रीय, राज्य-स्तरीय और स्थानीय शासन-प्रणालियां।
 
इकाई 5. सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दे : भारत के बहुलवादी ढांचे के प्रमुख अभिलक्षण; लिंग संबंधी मुद्देः परिवार और भारत में बच्चों का पालन-पोषण (इसका अध्ययन स्थानीय रूप से किए गए क्षेत्र कार्य पर आधारित परियोजना की सहायता से किया जाएगा)।
इकाई 6. समकालीन भारत के समक्ष प्रमुख मुद्दे (इनका अध्ययन कक्षागत और व्यक्तिगत परियोजनाओं की सहायता से किया जाएगा): भारत में बचपन: पर्यावरण और विकास; एक समतावादी नीति के रूप में आरक्षण; सामाजिक द्वंद।

                                     भाषा का स्वरूप

इकाई 1. भाषाई व्यवहार के विविध पक्ष : शाब्दिक तथा अशाब्दिक संप्रेषण; मानव तथा मानवेतर संप्रेषण; मानवीय संप्रेषण पद्धति के निर्धारक लक्षण; भाषा तथा मन; भाषा और समाज; नियम-नियंत्रित व्यवहार के रूप में भाषा तथा भाषाई परिवर्तनशीलता; वाक् तथा लेखन।

इकाई 2. भाषाई व्यवस्थाएं : स्वन-संगठन; वाक्य-संरचना; सार्वभौमिक व्याकरण की संकल्पना; अर्थ की प्रकृति तथा संरचना; स्वनिमविज्ञान; रूपविज्ञान, वाक्यविज्ञान तथा अर्थविज्ञान की मूलभूत संकल्पनाएं (उपयुक्त उदाहरण देकर पढ़ाई जाएंगी)। –

इकाई 3. पाठ (विषय) तथा भाषाई व्यवस्थाएं : पाठ-प्रोक्ति संरचना का गठन; मौखिक तथा लिखित; कक्षा-प्रोक्ति का स्वरूप पाठ्य सामग्री के प्रभावी शिक्षण में किसी कहानी, कविता, निबंध आदि की संरचना (प्रैक्टिकम द्वारा पढ़ाया जाएगा)।

इकाई 4. भारतीय भाषाएं : बहुभाषिकता; कक्षा के बहुभाषी संसाधनों का प्रयोग (प्रैक्टिकम द्वारा

                               कोर गणित

इकाई 1. संख्या और माप : गणना एवं स्थानीय मान; अंकगणितीय संक्रियाएं: सन्निकटन; आंकलन; भिन्न और दशमलव; लम्बाई, संहति, क्षेत्रफल, आयतन और समय की अवधारणाएं और मापन।

इकाई 2. दिक् स्थान और आकृति : समिति और प्रतिरूप (पैटर्न) – दो और तीन विमा वाली वस्तुओं के गुण-धर्म, जैसे – सममिति, प्रक्षेपण, संदर्श, चतुष्कोण, घनतम निचयन (क्लोज़ेस्ट पैकिंग)।

इकाई 3. बीजगणित : संख्याओं के पैटर्न; सरल रेखिक समीकरण बनाना और उन्हें हल करना – अन्य गणितीय अन्वेषण और पहेलियां।

इकाई 4. प्रायोगिक अंकगणित और आंकड़ों का प्रबंधन : आंकड़ों का संकलन, निरुपण और निर्वचन; सांख्यिकी की प्रारम्भिक तकनीकों का प्रयोग; समय-सारणी और उसको बनाने की विधि; प्रवाह-चार्ट; प्रतिशत; अनुपात एवं समानुपात; ब्याज; बट्टा (छूट); कर। अपेक्षा यह है कि विभिन्न अवधारणाओं एवं संक्रियाओं को क्रियाकलापों और समस्याओं के द्वारा पुननिर्मित किया जाएगा। समस्या के समाधान तक पहुंचने के लिए या अन्वेषण करने के लिए रसोईघर की मूर्त वस्तुओं का प्रायः उतना ही प्रयोग किया जाएगा जितना कि गणित की ‘किट’ का। फिर अवधारणाओं, समाधानों, परिणामों और प्रयुक्त विधियों (‘ठीक’ अथवा ‘गलत’, दोनों) पर परस्पर चर्चा की जाएगी।

                             कोर प्राकृतिक विज्ञान

इकाई 1. वर्गीकरण, गुणधर्म, अवधारणा, सम्बंध, नियम।

इकाइ 2. दूरी, द्रव्यमान और समय का मापन; घनत्व; दबाव; कार्य और ऊर्जा; भार; पिंडों का गिरना; गुरुत्वाकर्षण; गर्मी और तापमान; द्रव्य की अवस्थाएं: चुम्बक के गुणधर्म; विद्युत; प्रकाश का अपवर्तन और परिक्षेपण।।

इकाई 3. भौतिक तथा रासायनिक परिवर्तन; मिश्रणों का पृथक्करण; परमाणु और अणुः धातु और अधातु; ऑक्साइड; अम्ल, क्षार तथा लवण; हवा और दहन; जल-मृदु और कठोर।

इकाई 4. सजीव और निर्जीव, जीव जगत का वर्गीकरण; बीजों का अंकुरण; जैविक प्रक्रियाएं, जैसे श्वसन, पाचन, प्रजनन; प्रकाश-संश्लेषण, परिवहन, पौधों और प्राणियों की परस्पर-निर्भरता।

कोर सामाजिक विज्ञान

इकाई 1. सामाजिक विज्ञान की प्रकृति : इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र, समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र के परिप्रेक्ष्य में आंकड़ों, विधियों एवं प्रमाणों पर चर्चा; शिक्षार्थी (Learner) के विकास में सामाजिक विज्ञान विषय की भूमिकाः सामाजिक विज्ञान के अध्ययन में दृष्टिकोण एवं परिप्रेक्ष्य का महत्व (यथा 1857, धर्मनिरपेक्षता/सांप्रदायिकता)।

इकाई 2. मानवीय अनुभव तथा संस्थाओं के विकास के बीच संबंध का निम्न अवधारणाओं के परिप्रेक्ष्य में अध्ययन : राजतंत्र, कुलीनतंत्र, उपनिवेशवाद, फासीवाद, राष्ट्रवाद, लोकतंत्र तथा नागरिकता (इन अवधारणाओं को समुचित विषय वस्तु से उदाहरण देकर पढ़ाया जा सकता है किंतु जोर मुख्यतः अवधारणाओं के शिक्षण पर ही होना चाहिए।)

इकाई 3. मानव जीवन, स्थान (Space) तथा संसाधनों के बीच संबंधों का निम्न के परिप्रेक्ष्य में अध्ययन : निर्वाह-अर्थव्यवस्था से अधिशेष-अर्थव्यवस्था की ओर गतिः जनसांख्यिकी तथा समाज में संपत्ति का वितरणः स्थानों का परस्पर प्रभाव भारतीय संदर्भ में पढ़ाया जाएगा।

इकाई 4. समूह में लोगों के बीच परस्पर प्रभाव और संबंधों का अध्ययन : संस्कृति, सामाजिक स्तरीकरण तथा सामाजिक परिवर्तन।

इकाई 5. प्रोजेक्ट-कार्य : सामाजिक विज्ञान के अंर्तगत आने वाले विभिन्न विषयों के बीच अंतर्संबधों को प्रोजेक्ट-कार्य के माध्यम से रेखांकित किया जाएगा।

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