Hindi kahaniya(हिंदी कहानिया )

Posted by on December 27, 2019


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बुद्धू बना बुद्धिमान

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१४ साल का नंदू अपनी विधवा माँ के साथ गांव में रहता था

माँ सिलाई बुनाई करके अपनी घर ग्रहस्ती चलती थी
नंदू अपने गांव में सबसे बेवकूफ माना जाता था और यही उसकी पहचान बन चुकी थी

नंदू- माँ क्या आप कच्चोडी बना सकती है कल से बड़ा मन कर राहा है खाने का है

माँ- बेटा कोसिस करती तू लेकिन तुम अपनी पढाई पर ध्यान दो

नंदू- हां माँ तुम चिंता मत करो तुम्हारा बेटा होशियार है पता नहीं लेकिन पूरा गाओ तुम्हे बेवकूफ मनाता है हमेसा की तरह नंदू अपने स्कूल जा रा था रस्ते में गोपाल की चाय की टापरी थी जिसे नंदू का मजाक उड़ाना बहुत अच्छा लगता था गोपाल अपने आप को बहुत बिधबान और स्मार्ट समज़ता था जबकि असल बात ये थी

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कि वो केवल आठवीं क्लास तक पड़ा था लो आ गए हमारे गाओ के चतुर बीरबल बचके रहना साहब ये बहुत ही होशियार लड़का है

अच्छा जरा नमूना तो दिखाओ इसकी अक्ल मंडी का गोपाल पचास कि एक नोट अपने दाहिने और पांच रुपए का एक शिक्का अपने भाहीने हाथ में लेता है

और टपरी पे बैठे लोगो को आँख मारता है

नंदू -इसमें से जो तुम्हे बेहतर और फायदे कि चीज लगती है उसे उठाओ हा गोपाल भैया क्यों नहीं ये तो बड़ा ही आसान है रोज रोज यही तो सबाल पूछते हो मुझसे और हां मुझे लगता है कि तुम कभी तो गलती करोगे लेकिन तुम तो बड़े ही होशियार हो बेटा सब लोग बड़े ही उत्सुकता से नंदू का चुनाव देख रे है नंदू वो पांच रुपए कि नोट छोड़ कर वो पांच रुपए का शिक्का उठा कर भहा से चला जाता है

ये अब रोज का किस्सा बन गया था गोपाल स्कूल जा रहे नंदू को बुलाता और उसे कभी पचास और कभी सौ रुपए और पांच रुपए में चुनाव करने को कहता

और उसके गलत चुनाव पर टापरी पर उपस्तिथ लोगो के साथ पेट भर के हस लेता आज भी हमेसा कि तरह स्कूल जाते नंदू को पुकारा नंदू जरा यह तो आना आज का सवाल जबाव बाकि है

नंदू – हां भैया क्यों नहीं आता हु आज उस टपरी पे नए गुरूसृत मनोहर भी मौजूत थे किसी काम से वो गाओ से अपने बहन के घर आये हुए है पधारिये पधरिये मिस्टर तेज दिमाग लोगो अब देखिये हमारे गाओ के सबसे होशियार लड़के कि अक्ल मंडी उस गोपाल ने एक हाथ में दोसो रुपए और दूसरे हाथ में दस रुपए रखे थे

और नंदू को उसमे से ज्यादा फायदे वाला विकल्प चुनना था इस बार नंदू थिओडॉ सोच में पढ़ गया दोसो कि नए नोट उसने पहली बार देखी थी सब लोग उत्सुकता से नंदू को देख रहे थे

और देखो ठीक से सोच के चुनाव करो कहि तुम्हारा नुक्सान न हो जाये हां भैया आप चिंता मत करो मै हमेसा कि तरह सही चुनाव ही करुगा इस बार भी नंदू ने वो दोसो रुपए कि नोट छोड़ कर वो दस रुपए का सिक्का उठाया और वहा से चल पड़ा

देखा आपने कितना मुर्ख बेवकूफ लड़का है ये पता नहीं शूल मै इसका धयान कहा होता है बेचारी अकेली माँ इससे क्या उम्मीद लगा बैठी होगी भगवान् भला करे उसका हा और नहीं तो क्या इतनी छोटी सी बात उसके पल्ले नई पढ़ रही आगे जेक बहुत मुश्किल होगी

उसे चिंता का बिसह तो है टापरी पे मौजूद मनोहर चाय पीकर अपने किसी काम पर निकल पड़ते है

थोड़ी ही दूर आने के बाद उन्हें नंदू एकआइसक्रीम कि दुकान से आएसक्रीम कहते हुए दिखाई पड़ता है इस लड़के को दो चार अक्ल मंडी कि बाते समझाता हु सायद कोई फायदा हो सुनो बेटा नंदू जी चाचा जी अभी आप कुछ देर पहले गोपाल भैया के टपरे पाए थे न अरे बा तुम्हे याद है जी चाचा इसमें कौन सी अक्ल मंडी कि बात है

आपका चेहरा नया था ऐसी लिए याद रहा अरे बाहः तुम तो बड़े होशियार हो तो तुमने वहा टपरी पर दस रुपए कि जगह दोसो रुपए क्यों नई उठाये तुम्हे नई लगता कि तुम्हारा चुनाव गलत था नुक्सान दायक था बिलकुल नहीं चाचा जी बो कैसे नंदू मनोहर को अपने हाथ मै पकड़ा आएसक्रीम दिखाता है

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लेकिन मनोहर कुछ समझ नई पाता अगर मेने फायदे वाला चुनाव यानी की दोसो रुपया उठाये होते तो आज ये मेरे फायदे का खेल ख़तम हो जाता मतलब उन चाय वाले गोपाल भैया को लगता है की में बुद्दू हु और उसी लिए बो रोज मेरे साथ ये खेल खेलते है लेकिन गलत जबाव देके मुझे रोज ये भारी वाली आइसक्रीम खाने को मिलती है वो भी फ्री स्कूल का टाइम हो रा है में चलता हु नंदू का जबाव सुन कर मनोहर दंग रह जाते है औ कमल है ये लड़का तो सच में बहुत अक्ल मंद है ये तो उस चाय वाले को उल्लू बना रहा है और उसको पता भी नहीं ये तो जरूर बहुत आगे बढ़ेगा




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